नारी .. तुम हो नारायणी!
अविचल दृष्टि, तना है सीना
उन्नत माथा कभी न झुके
शंखनाद कर, हाथ शस्त्र ले,
नारीशक्ति ये अब न रुके!
दृढ़ संकल्प से,उग्र तप किए
कर्तव्य कठोर ये पथ चुना है
कंटकों की नोंक पर जो
स्वप्न यौवन का बुना है !
कितनी बाधायें झेली हैं,
कष्टों से स्वयं को तराशा है,
बढ़ता हर एक कदम तेरा
हर नन्ही की आशा है |
तेरे प्रेरक कदमताल से
कर्तव्यपथ ये चमक उठा |
आलोकित हो सारी दिशायें
भारत का मधुबन महक उठा!
आकाश को भी चीरता है
तेरे सामर्थ्य का ये मेल,
तंत्र यंत्र सब तेरे अंकित
तेजस हो या हो राफेल!
विकसित राष्ट्र की नींव तुम
भारत लोकतंत्र की मातृका |
अपराजिता,मनपर तेरे
विजय न कोई पा सका !
स्वतंत्रता की रक्षा करती
रणलक्ष्मी तुम पावनी
समस्त भारत का अभिमान,
नारी, तुम हो नारायणी!
नारी, तुम हो नारायणी!!
- मेजर मोहिनी गर्गे- कुलकर्णी (नि.)©

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