Dumbo : Sky is the limit...!



अच्छे कार्यक्रम,प्रदर्शनी तथा सिनेमा ये सब हम हमेशा खोजते है...सराहना करते है।इन प्रभावी माध्यमों की वजह से अप्रत्यक्ष रूपमें कई भिन्न विषय बच्चोंके मन में उतरते है।हाल ही में Disney का एक cinema आया था “Dumbo”...जिसकी पुस्तक कई दिन पहलेसे बच्चे घर में पढ़ रहे थे।इसकी कथा काल्पनिक है (fantasy)।

अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही एक सर्कस में एक मादा हाथी(हथनी) ऐसे शिशु को जन्म देती है जिसके कान बहुत लम्बे होते है।इसकी देखभाल के लिए सर्कस का मालिक एक छोटे भाई-बहन,जिन्होंने हाल ही में अपनी माता खोयी है, और उनके पिता को नियुक्त करता है।शिशु का नाम Dumbo रखा जाता है।पैसों के कारण मालिक को उस हथनी को किसी बड़े सर्कस में बेचना पड़ता है। शिशु और माँ की दूरी की वजह से दोनो बच्चें व्यथित हो जाते है।सबसे अचम्बित करनेवाली बात ये है की सब लोगोंके डम्बो पर हसनेके बावजूद भी बच्चे उसे बड़ा प्यार करते है।“मुझे बड़ी हो कर वैज्ञानिक बनना है” ये सपना देखनेवाली लड़की ये निरीक्षण करती है की इधर-उधर से  उड़कर आया हुआ कोई भी छोटा पर (पंख) जब डम्बो की सूँड़ में अटकता है तो छींकते हुए वो छोटी उड़ान भरता है।बहुत प्रयासपूर्वक वो डम्बोको  जताती है की वो उड़ सकता है।ख़बर फैल जाती है और सर्कस में जोकर का काम करता हुआ डम्बो अचानक से star बन जाता है।कई बड़े सर्कसोंके मालिक उसे पाने की कोशिश करते  है।किन्तु बच्चे डम्बो और उसकी माँ को मिलाने की ठान लेते हुए उसके उड़ जानेका एक plan तैयार करते है।

उड़ान भरते समय डम्बो की सूँड़से छोटा पर उड़ जाता है और वो पीछे हट जाता है तब वो लड़की ऐसा कुछ करती है और कहती है जिसके कारण डम्बो अपनी शक्ति से परिचित होता है और बिना पर पकड़ेभी ऊँची उड़ान भरता है।मुक्त हो जाता है।सर्कस का तंबू चीरते हुए अपनी माँ के पास पहुँचता है। दोनोंको जंगल में छोड़ दिया जाता है।

मैं स्वयं,बाबा(वैभव), रेवा(६+) और राधा(३+) हम सब साथमें ये देखने गए थे।डम्बो जब उड़ान भरता है तब तुरंत बड़े ज़ोरसे “य्ये.........” कहके झूमती हुई छोटी राधा को देखकर मुझे आनंद हुआ की ये कहानी उसे समझ आयी!
बाद में डम्बो पर रेवा-राधा चर्चा करने लगे...राधा बोली, “डम्बो और उसकी mummy मिल गए...कितना अच्छा लगा तब!” रेवा बोलने लगी, “मुझे वो भाई-बहन बहुत भले लगे...अगर वो नहीं होते तो डम्बो को पता कैसे चलता की वो उड़ सकता है।बाबा ने इस विचार को बढ़ाते हुए कहा, “सच है।बच्चों ने डम्बो का निरीक्षण किया और ढूँढ निकाला की वो उड़ सकता है..ये सबसे मौलिक क्षण था।”

अबतक शांत... मैं भी सोचने लगी... डम्बो क्या है मेरे लिए?तभी वो scene मेरे सामने आया जब सूँड़ से पर उड़ जाने के बाद डम्बो हारने लगता है तब वो लड़की अपने गले का locket तोड़कर आग में फेंक देती है।कहती है, “आज तक मैं समझती रही की इसी locket के कारण मैं सब अच्छे काम कर सकती हूँ।मेरी शक्ति इसी में है।इसके बिना मैं कुछ भी नहीं कर पाऊँगी।किन्तु ऐसा नहीं है डम्बो।शक्ति इस locket में नहीं,मेरे मन में है।तुम भी किसी पर की प्रतीक्षा मत करो।पर लिए बिना भी तुम उड़ सकते हो...इसीलिए ईश्वर ने तुम्हारे कान लंबे बनाए है।ये वरदान है...इसे पहचानो और उड़ान भरो..!”
मुझे लगता है की मैं और हम सभी ऐसे कई पर अपने मन में रखते है...कभी प्यार से..कभी दुखसे..या मजबूरी से!और सोचते है की इसके बिना हम कुछ भी नहीं कर पाएँगे...स्वयं को जकड़कर रख देते है इसी विचार में...और उसे छोड़कर उड़नेसे डरते है।हमारी शृंखलाएँ बन जाती है यही धारणाँए।...जैसे की किसी support के बिना मैं अकेली कर ही क्या सकती हूँ। परंतु एक ही क्षण काफ़ी है...ये समझनेकी देर है बस...अपने  रास्ते खोज कर आगे बढ़ जाते है...हमारे मन से ऐसे सारे सहारे,मजबूरियाँ...उड़ा देते है और खुले गगन में उड़ान भरते है...है ना?

 - मोहिनी गर्गे- कुलकर्णी.
(17 में 2019)

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